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Samastipur News: बिथान-हसनपुर निरीक्षण के दौरान निजी नर्सिंग होम पर सवालों में घिरे सिविल सर्जन, कार्रवाई को लेकर उठे प्रश्न

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Alam Ki Khabar | समस्तीपुर के बिथान और हसनपुर के निरीक्षण के दौरान पत्रकारों ने कथित अवैध नर्सिंग होम और निजी क्लीनिकों पर कार्रवाई को लेकर सिविल सर्जन से सवाल पूछे।

समस्तीपुर, 20 जुलाई। आलम की खबर: बिथान और हसनपुर के स्वास्थ्य संस्थानों के औचक निरीक्षण पर पहुंचे सिविल सर्जन उस समय पत्रकारों के सवालों से घिर गए, जब हसनपुर में कथित रूप से अवैध तरीके से संचालित निजी नर्सिंग होम और प्राइवेट क्लीनिकों पर कार्रवाई को लेकर उनसे जवाब मांगा गया। पत्रकारों ने कहा कि इस मुद्दे पर लंबे समय से लगातार खबरें प्रकाशित हो रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं दिख रही है।

पत्रकारों ने सवाल किया कि यदि बिना मानकों के निजी नर्सिंग होम और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं तो उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, सिविल सर्जन इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे सके और हाथ जोड़कर वहां से आगे बढ़ गए। इसके बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा शुरू हो गई कि आखिर स्वास्थ्य विभाग अवैध रूप से संचालित संस्थानों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने से क्यों बच रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिले में बिना नियमों के निजी अस्पताल और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं तो इससे मरीजों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

हालांकि, इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यदि विभाग अपनी प्रतिक्रिया जारी करता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई

लगातार उठ रही शिकायतों के बीच अब लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि शिकायतें सही हैं तो नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और यदि शिकायतें गलत हैं तो विभाग को स्पष्ट रूप से स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि लोगों के बीच फैली शंकाएं दूर हो सकें।

सवालों से बचने से नहीं, कार्रवाई से बनेगा स्वास्थ्य विभाग पर भरोसा

हसनपुर में कथित रूप से अवैध निजी नर्सिंग होम और क्लीनिकों के संचालन की शिकायतें कोई नई बात नहीं हैं। समय-समय पर स्थानीय लोगों और पत्रकारों द्वारा यह मुद्दा उठाया जाता रहा है। ऐसे में जब निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन से इस संबंध में सवाल पूछे गए और स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया, तो स्वाभाविक रूप से लोगों के मन में कई प्रश्न खड़े हुए।

स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी केवल सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण करना नहीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि जिले में चल रहे सभी निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लीनिक निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हों। यदि कोई संस्थान बिना आवश्यक अनुमति या मानकों के चल रहा है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि सभी संस्थान नियमों का पालन कर रहे हैं, तो विभाग को इसकी जानकारी सार्वजनिक कर लोगों का भ्रम भी दूर करना चाहिए।

पत्रकारों का काम जनहित के मुद्दों पर सवाल पूछना है और प्रशासन का दायित्व उन सवालों का तथ्यों के साथ जवाब देना। जवाबदेही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। सवालों से बचना या चुप्पी साध लेना समाधान नहीं है, बल्कि इससे संदेह और गहरा होता है।

अब आवश्यकता इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग जिले के सभी निजी नर्सिंग होम और क्लीनिकों की निष्पक्ष जांच कराए, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करे और जो भी संस्थान नियमों का उल्लंघन करते मिले, उनके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करे। यही कदम स्वास्थ्य व्यवस्था में लोगों का भरोसा मजबूत करेगा और यह संदेश देगा कि कानून सबके लिए समान है।

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